बस यह घरेलू उपाय करते ही अतिसार या दस्त जड़ से खत्म

अतिसार या दस्त रोग क्यों होता है

अग्नि मंद होने के कारण बड़े हुए द्रव्य धातु से भरा मल गुदामार्ग से बार बार निकलता है तो उसे अतिसार या दस्त कहते हैं |दूसरे शब्दों में इसे आंतों की बीमारी भी कह सकते हैं दस्त लगने के मुख्य कारण हैं |अत्यधिक शराब का सेवन दूसरे बासी भोजन, गरिष्ठ भोजन के बाद ठंडा या गरम भोजन करना आदि|

रोगी की पहचान कैसे करें

पेट में मरोड़ गुड़गुड़ाहट खट्टी डकारे आना आदि दस्त रोग लगने की पहचान है शुरू में पेट में दर्द होता है तथा रोगी को बार बार मल त्याग करने के लिए जाना पड़ता है कई बार दस्त के साथ खून भी आने लगता है|

घरेलू उपचार

1-सौंफ धनिया तथा जीरा तीनों को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर आधा-आधा चम्मच दिन में तीन बार मट्ठे के साथ सेवन करें

2-पतली दस्त पिचकारी जैसी छूटने पर अनारदाना ,सौंफ, धनिया तथा जीरा पाव मात्रा में लेकर पीस लें इसमें खांड या मिश्री मिलाकर दिन में 4 बार आधा आधा चम्मच पानी के साथ लें

3-आम की गुठली का गूदा निकाल कर उसे पीसकर चटनी बना लें उसमें से 2 ग्राम चटनी शहद के साथ सेवन करें

4-कच्चे बेल का गूदा निकालकर उसे आग में भूनकर खाएं बेल का भुना हुआ गोदा बड़ी दस्त को रोकता है

5-खूनी दस्त की हालत मेंआंवले का चूर्ण शहद के साथ जाते हैं|

6-पका हुआ बेल का गूदा दही के साथ खाएं|

7-जामुन की गिरी और आम की गुठली का चूर्ण भुनी हुई हरड़ के साथ सेवन करने से भी काफी लाभ होता है|

8-थोड़ी सी सौंफ पानी में भिगो दें कुछ देर बाद रोगी को सौंफ का पानी छानकर दिन में चार पांच बार खाएं|

9-दही मे केले तथा चार दाने केसर के मिलाकर सेवन करें|

 

जड़ी बूटियों द्वारा दस्त का इलाज

 

1-तुलसी के पांच पत्ते पुदीने के पांच पत्ते नीम की 2 कोपले तीनों को कम पानी में गरम करें जब पानी एक कप बचा रह जाए तो उसे महीन छलनी से छानकर ठंडा करके दिन में तीन बार सेवन करें|

 

2-नीम के 10 पत्तों में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर एक कप पानी का काढ़ा बनाकर सेवन करें|

 

3-तुलसी के पत्ते और जायफल का चूर्ण चौथाई चम्मच मिलाकर दोनों का काढ़ा बनाकर सेवन करें|

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