सांस फूलना या दमा के मरीजों के लिए भोजन तथा परहेज जरुर पढ़ें

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सांस फूलना या दमा रोग क्यो

यह स्वास संस्था का एक भयंकर रोग है इसमें सांस नली में सूजन या उसमें कफ जम जाता है जिसके कारण सांस लेने में बहुत ज्यादा करना ही होती है इसका दौरा प्राया सुबह के समय पड़ता है यह एक एलर्जी तथा जटिल बीमारी है जो ज्यादातर श्वास नलिका में धूल के कण चले जाने के कारण यह स्वास नाली में ठंड लग जाने के कारण होती है|

रोगी की पहचान

इस बीमारी में खांसी आती है सांस फूलने लगती है और सांवरिया में कठिनाई हो जाती है| जाड़े के मौसम में पानी में भीगने या ठंड लग जाने के कारण उसका दौरा तेज पड़ता है द्वारा पढ़ते समय सांस लेने में कई कठिनाइयां होती हैं| कभी-कभी डर तनाव तथा सोचने के कारण यह बीमारी और अधिक बढ़ जाती है बेचैनी बढ़ने के कारण रहोगी अपने हाथ पांव पटकने लगता है|

दमा के मरीज के लिए भोजन तथा परहेज

1-रोगी को एक बार में भरपेट भोजन ना दे बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके दिन में 4 से 5 बार भोजन खिलाएं|

2-इस रोग में बकरी का दूध बहुत फायदेमंद होता है|

3-कमरे की खिड़कियां खुली रखें यदि रोगी को ठंड लगे तो कंबल या चादर ओढ़ने के लिए दें
लेकिन वायु शुद्ध आने दे |

4-रोगी को कड़ी धूप में कभी ना बिठाएं बिल्कुल धूप के पास वाले स्थान में बिठाना चाहिए|

 

5-रोगी के छाती पर प्रतिदिन सुबह की सूर्य की किरण डालनी चाहिए|

6-रोगी को ठंडी या गर्म तासीर वाली चीजें खाने को ना दें हल्का भोजन ही दे|

7-छाती तथा गले को ठंड से बचाएं पेट में कब्ज हो जाए तो उसे दूर करने के लिए फलों का रस गर्म करके दें दस्त लगने वाले चूर्ण का इस्तेमाल ना करें क्योंकि दमा के रोगी की सहनशक्ति बहुत कम होती है|

8-रोगी को शांत मन रहने दे उसे किसी प्रकार की चिंता तनाव क्रोध उत्तेजना आज से बचाएं क्योंकि यह दमे का कारण बन सकती है|

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