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BHAGVAT GEETA, कृष्ण ने बताया कर्म है हमारा साथी

नमस्कार दोस्तों | आज हम आपसे एक बहुत ही खास मुद्दे के बारे में बात करने जा रहे हैं | यह मुद्दा हमारे जीवन से तो जुड़ा ही है और हमारे आसपास के लोगों से भी जुड़ा है इसलिए यह टॉपिक हमारे लिए बहुत जरुरी हो जाता है| आज हम आपसे भगवत गीता के बारे में बात करने जा रहे हैं भगवत गीता जो अपने समय में सार्थक थी उतना ही सार्थक वह आज के समय में भी है |

भगवत गीता (BHAGVAT GEETA) में कृष्ण और अर्जुन के श्लोक को संवाद के रूप में संकलित किया गया है भगवत गीता के किस श्लोक में कृष्ण अर्जुन से कहते हैं | कि जो कुछ कर्म है वह सब दुःखरूप ही है- ऐसा समझकर यदि कोई शारीरिक क्लेश के भय से कर्तव्य-कर्मों का त्याग कर दे तो वह ऐसा राजस त्याग करके त्याग के फल को किसी प्रकार भी नहीं पाता |

अगर यह श्लोक आपको समझ में नहीं आया है | तो हम आगे से आपको विस्तार से बताएंगे श्री श्री कृष्ण भगवान कहते हैं कि जो व्यक्ति कर्म करने से डरता है या कर्म करने से पीछे हटता है | उसे सफलता नहीं मिलती है और जो व्यक्ति डेट कर अपने काम को ईमानदारी से करता है उसकी सफलता मिलना लगभग तय हो जाता है | इससे हमें यह ज्ञान मिलता है कि हमें अपने कर्म को बिना फल की इच्छा के शब्द रूप से करना चाहिए|

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