Quick and effective home remedy for acidity | एसिडिटी को दूर भगाने के असरदार घरेलू नुस्खे

परिचय:-

अम्लता (एसिडिटी) रोग के कारण रोगी व्यक्ति के पेट में कब्ज बनने लगती है जिसके कारण उसके पेट में हल्का-हल्का दर्द बना रहता है। इस रोग में रोगी का खाया हुआ खाना पचता नहीं है। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है।

अम्लता रोग होने के लक्षण:-

अम्लता (एसिडिटी) रोग के कारण रोगी के पेट में जलन होने लगती है, उल्टी तथा खट्टी डकार आने लगती है और रोगी व्यक्ति को मिचली भी होने लगती है।

अम्लता रोग होने के कारण:-

  • अम्लता रोग पेट में कब्ज रहने के कारण होता है।
  • मानसिक तनाव तथा अधिक चिंता फिक्र करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  • तेज मसालेदार भोजन खाना, भूख से अधिक खाना, कॉफी-चाय, शराब, धूम्रपान तथा तम्बाकू का अधिक सेवन करना आदि से भी अम्लता रोग हो जाता है।
  • गुटका खाने, चीनी तथा नमक का अधिक सेवन करने और मानसिक तनाव के कारण भी अम्लता रोग हो सकता है।
  • पेट में अधिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का स्राव होने के कारण भी अम्लता रोग हो जाता है।

अम्लता रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

  • अम्लता रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को गाजर, खीरा, पत्ता गोभी, लौकी तथा पेठे का अधिक सेवन करना चाहिए।
  • अम्लता रोग से पीड़ित रोगी को सप्ताह में 1 बार उपवास रखना चाहिए ताकि उसकी पाचनशक्ति पर दबाव कम पड़े और पाचनशक्ति अपना कार्य सही से कर सके। इसके फलस्वरूप अम्लता रोग जल्द ही ठीक हो जाता है।
  • अम्लता रोग से ग्रस्त रोगी को 1 सप्ताह से 3 सप्ताह तक केवल फल, सलाद तथा अंकुरित अन्न ही खाने चाहिए तथा रोगी व्यक्ति को चीनी तथा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। जब कभी भी रोगी व्यक्ति को खाना खाना हो तो उसे भोजन को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाना चाहिए।
  • अम्लता रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू, शहद का पानी, नारियल पानी, फलों का रस और सब्जियों का रस अधिक पीना चाहिए।
  • गाजर तथा पत्तागोभी का रस इस रोग से पीड़ित रोगी के लिए बहुत ही उपयोगी है। इनका सेवन प्रतिदिन करने से अम्लता रोग ठीक हो जाता है।
  • ताजे आंवले का रस या फिर आंवले का चूर्ण रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन चटाने से अम्लता रोग कुछ ही दिनों में ही ठीक हो जाता है।
  • थोड़ी सी हल्दी को शहद में मिलाकर चाटने से भी रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है। हल्दी तथा शहद के मिश्रण को चाटने के बाद रोगी को गुनगुना पानी पीना चाहिए।
  • 5 तुलसी के पत्तों को सुबह के समय में चबाने से अम्लता रोग  नहीं होता है।
  • अम्लता रोग से पीड़ित रोगी को अगर सूर्य की किरणों से बनाया गया आसमानी बोतल का पानी 2-2 घंटे पर पिलाया जाए तो उसे बहुत अधिक लाभ मिलता है और उसका रोग ठीक हो जाता है।
  • अम्लता रोग से पीड़ित रोगी को भोजन करने के बाद वज्रासन करना चाहिए इससे अम्लता रोग ठीक हो जाता है।
  • अम्लता रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में रोज एनिमा क्रिया करनी चाहिए तथा इसके बाद कुंजल क्रिया करना चाहिए और इसके बाद स्नान करना चाहिए। फिर सूखे तौलिये से शरीर को अच्छी तरह से रगड़ना चाहिए। इसके परिणाम स्वरूप यह रोग तथा बहुत से रोग ठीक हो जाते हैं।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को खुली हवा में लम्बी-लम्बी सांसे लेनी चाहिए।
  • रोगी व्यक्ति का इलाज करने के लिए रोगी के पेट पर गीली मिट्टी की पट्टी करनी चाहिए तथा इसके बाद रोगी को कटिस्नान कराना चाहिए। फिर उसके पेट गर्म तथा ठंडा सेंक करना चाहिए। इसके बाद रोगी को गर्म पाद स्नान भी कराना चाहिए तथा सप्ताह में एक बार रोगी व्यक्ति के शरीर पर गीली चादर लपेटनी चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • अम्लता रोग से पीड़ित रोगी को तुरन्त आराम पाने के लिए अपने पेट पर गर्म व ठंडी सिंकाई करनी चाहिए।
  • अम्लता रोग से पीड़ित रोगी यदि प्रतिदिन रात को सोते समय अपने पेट पर ठंडी पट्टी करे तो उसका यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह उठकर नियमानुसार शौच के लिए जाना चाहिए तथा अपने दांतों को साफ करना चाहिए।
  • रोगी व्यक्ति को रात के समय में सोने से पहले तांबे के बर्तन में पानी को भरकर रखना चाहिए तथा सुबह के समय में उठकर उस पानी को पीना चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

अम्लता रोग से पीड़ित रोगी के लिए सावधानी :-

  • प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार अम्लता रोग से पीड़ित रोगी को दूध का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि दूध एक बार तो जलन को शांत कर देता है लेकिन दूध को हजम करने के लिए पेट की पाचनशक्ति को तेज करना पड़ता है और यदि रोगी को अम्लता रोग हो जाता है तो उसकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।
  • दवाइयों के द्वारा यह रोग ठीक तो हो जाता है लेकिन बाद में यह रोग अल्सर रोग बन जाता है तथा यह रोग कई रोगों के होने का कारण भी बन जाता है जैसे- नेत्र रोग, हृदय रोग आदि। इसलिए दवाईयों के द्वारा इस रोग को ठीक नहीं करना चाहिए बल्कि इसका इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करना चाहिए।

जानकारी

इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज करने से रोगी का अम्लता रोग ठीक हो जाता है तथा बहुत समय तक यह रोग व्यक्ति को फिर दुबारा भी नहीं होता है। यदि रोगी व्यक्ति अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे तो उसे दुबारा यह रोग नहीं होता है।

Acidity introduction:-

Due to acidity (acidity), constipation begins to cause constipation in the patient’s stomach, which results in light pain in his stomach. In this disease, food eaten by the patient does not digest. This disease can be treated with natural medicine.

Signs of Acidity Disease:

Due to acidity (acidity), the patient starts to feel irritation in the stomach, vomiting and sour duct, and the patient becomes even nauseous.

Due to acidity disease: –

Acidity is caused by constipation in the stomach. This disease can also be caused due to worry about mental stress and more anxiety.

Eating acrid spicy food, eating more than hunger, drinking coffee, tea, alcohol, smoking and tobacco consumption, etc. also leads to acidity. Gum diet, sugar and salt intake, and mental stress can also cause acidity.

Due to the secretion of excess hydrochloric acid in the stomach also causes acidity disease.

Treatment with the treatment of the patient with acidity of the disease: –

In order to treat acidity disease with natural healing, the patient should consume more carrot, cucumber, leaf cabbage, gourd and peetha. A patient suffering from acetic acid should be kept fast during the week so that pressure on his digestibility is reduced and digestion can be done properly. As a result, acidity disease is cured soon.

Acidity sufferers should eat only fruits, salads and sprouts from 1 week to 3 weeks, and the patient should not eat sugar and salt. Whenever a patient has to eat food, then he should eat food chew and chew properly.

A patient suffering from acidity, should drink lemon, honey water, coconut water, fruit juice and vegetables juice daily.

Carrot and cabbage juice are very useful for the patient suffering from this disease. Consuming intake of it every day improves acidity. Aceticity of fresh amla juice or amla powdered patient daily will cure acidic disease within a few days.

Licking with a little turmeric mixed with honey also gives a lot of benefit to the patient. After licking the mixture of turmeric and honey, the patient should drink lukewarm water. 5 Chewing tea leaves in the morning does not lead to acidity.

If the patient with acidity disease is given a water bottle of water made from rays of sun, it gets very much benefit and its disease gets cured.

The patient suffering from acetic acid should be vigilant after feeding, it cures acidity.

The patient suffering from acetic acid should do an enema daily in the morning and after that the kinjal should be done and bath after it. Then the body should rub well with dry towels. As a result, this disease and many diseases are cured.

The patient suffering from this disease should take long-term respiration in the open air. To cure the patient, the wet clay should be bandaged on the patient’s stomach and after this, the patient should be cautious. Then its stomach should be hot and cold. After this, the patient should also have a warm foot bath and once a week the patient should wrap the wet sheet on the body.

In this way, the disease gets cured soon after treatment. The patient suffering from acidity, should be hot and cold on his stomach to get relief immediately. If the sufferers of acidity suffer from cold stomach on their stomach every night while sleeping, then this disease gets cured soon. The patient should rise in the morning every morning and go to the toilet as per rules and clean his teeth.

The patient should keep the water in the copper vessel before sleeping in the night and should drink the water after getting up in the morning. As a result, this disease is cured within a few days.

Caution for the patient suffering from acidity disease: –

According to natural medicine, the patient suffering from acidity disease should not consume milk because milk once calms the irritation, but digestion of the stomach has to be accelerated to digest milk and if the patient has acidity disease So its digestive power becomes weak.

This disease is correct by medicines but later this disease becomes ulcer disease and this disease also becomes the cause of many diseases such as eye disease, cardiovascular disease etc.

Therefore, this disease should not be cured by medicines, but it should be treated with natural medicine.

Information

In this way treatment with natural medicine cured the acidity of the patient and for a long time the person does not have this disease again. If the patient gives special attention to his health, then he does not have this disease again.

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